शैतान का तंत्रकार – 1
ऊँचे पहाड़ों और हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ एक बेहद खूबसूरत और छोटा-सा जंगल था।
इसी जंगल में एक ‘बूढ़ी गाय’ रहती थी, जो बहुत ही ज्ञानी, दयालु और समझदार थी।
वह रोज़ सुबह बच्चों को लेकर पहाड़ों की निचली खाई में बने हरे-भरे मैदान में जाती थी।
बच्चे मैदान में उछल-कूद करते, ताज़ी घास-पत्तियाँ खाते और खुशी से दिन बिताते थे।
बूढ़ी गाय धूप में आँखें मूँदकर आराम तो करती, लेकिन बीच-बीच में चिंताभरी नज़रों से बच्चों पर नज़र भी रखती थी।
शाम ढलते ही वह ममत्व भरी आवाज़ में पुकारकर सभी बच्चों को गुफा के भीतर सुरक्षित पहुँचा देती थी।
बूढ़ी गाय की गुफा के पास ही एक ‘काली बिल्ली’ रहती थी।
काली बिल्ली का सपना एक महान तांत्रिक बनने का था।
इसीलिए वह पास के दूसरे जंगल में रहने वाले अपने गुरु ‘तांत्रिक उल्लू’ से तंत्र-मंत्र की विद्या सीखती थी।
एक रात, काली बिल्ली को खाई की तरफ़ से किसी के रोने और कराहने की अजीब आवाज़ें सुनाई दीं।
उसने डरते-डरते गुफा से बाहर झाँका, तो देखा कि सफ़ेद चादर ओढ़े, लाल-लाल गोल आँखों वाला एक विशालकाय ‘गोरिल्ला शैतान’ इधर-उधर घूम रहा है।
अगली सुबह, काली बिल्ली ने काँपते हाथों और डरी हुई आँखों से यह बात बूढ़ी गाय और जंगल के बाकी जानवरों को बताई।
जंगल में डर का माहौल छा गया। बच्चों के चेहरे पर शिकन आ गई और वे रोने लगे।
तब बूढ़ी गाय ने धैर्यपूर्वक कहा, “घबराओ मत! काली बिल्ली, तुम तुरंत अपने गुरु तांत्रिक उल्लू को बुला लाओ। तब तक सब बच्चे अपनी-अपनी गुफाओं में सुरक्षित रहेंगे।”
रात के आठ बजते ही तांत्रिक उल्लू और काली बिल्ली हवन कुंड के पास तंत्र-मंत्र पढ़ने लगे।
ठीक रात बारह बजे, वह गोरिल्ला शैतान बड़ी बेफ़िक्री से उड़ता हुआ आया।
उसकी बड़ी-बड़ी लाल आँखें देखकर तांत्रिक उल्लू और बिल्ली के पसीने छूट गए।
जब उल्लू का तंत्र-मंत्र काम न आया, तो वह रोते हुए चिल्लाया, “बचाओ! यह शैतान तो हमारी विद्या से भी ज़्यादा ताक़तवर है!” दोनों डर के मारे पास की एक गुफा में जा छिपे।
पास कि गुफा में तीन विशाल और निडर ‘सूअर’ आराम कर रहे थे।
बाहर झाँकने पर उन्होंने देखा कि गोरिल्ला शैतान हवन कुंड की आग सेककर मजे से बैठा है।
तीनों सूअरों ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा, उनके चेहरों पर एक मुस्कान और आत्मविश्वास था।
उन्होंने कहा, “यह कोई शैतान नहीं, बल्कि ठंढ से ठिठुरता हुआ एक जीव है, जो आग सेक रहा है!”तीनों सूअर तेज़ी से दौड़े।
एक ने पीछे से जाकर गोरिल्ला की टांग खींच ली। गोरिल्ला संतुलन खोकर सीधा जलते हुए हवन कुंड के पास गिरा, जिससे उसकी सफ़ेद चादर जल गई और धमाका हुआ। गोरिल्ला खड़ा हुआ ।
सफ़ेद चादर हटते ही सबका भ्रम टूट गया—वह कोई भयानक शैतान नहीं, बल्कि एक साधारण गोरिल्ला था जो केवल ठंड से बचने के लिए आग ढूँढ रहा था।
सीख
अंधविश्वास और काल्पनिक डर से बड़ा कोई शत्रु नहीं होता: बिना सच जाने किसी बात या अफ़वाह से डरना नहीं चाहिए।
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